रसूल इल्म का शहर और अली उसके दरवाज़ा हैं : कर्रार हुसैन ख़ान

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रसूल इल्म का शहर और अली उसके दरवाज़ा हैं : कर्रार हुसैन ख़ान


अंबेडकरनगर। नगर के बड़ा इमामबाड़ा मीरानपुर में मरहूम सैयद हसन अब्बास हस्सू के पुण्य हेतु मजलिस कार्यक्रम संपन्न हुआ। अजीज मेहदी रिजवी द्वारा आयोजित मजलिस को मुंबई से आए मौलाना कर्रार हुसैन खान गदीरी ने संबोधित किया।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हजरत अली की शुजाअत ही नहीं इंसाफ पसंदी भी तारीख के सुनहरे पन्नों में दर्ज है। वह अपने शासनकाल में निजी कामों के लिए सरकारी खज़ाने से जलने वाला चिराग भी बुझा देते थे।इसी ईमानदारी और ईश्वर के उपदेशों की पैरोकारी की वजह से तमाम सरदार उनके मुखालिफ हो गये थे ।
मौलाए कायनात का कहना है कि अत्याचार करने वाला, उसमें सहायता करने वाला और अत्याचार से खुश होने वाला भी अत्याचारी है। हज़रत अली ने अपनी पुस्तक नहजुल बलागाह में जीवन का कोई पहलू नहीं छोड़ा है। पैग़म्बरे इस्लाम मोहम्मद मुस्तफा सल्लललाहो अलैहे वाआलेही वसल्लम ने कहा मैं इल्म का शहर और अली उसके दरवाजा हैं। अली ऐसे व्यक्तित्व हैं जिनकी विलादत और शहादत दोनों मोजिज़ा है। वह सिफात के मरकज़ थे तभी तो पैदा भी अल्लाह के घर में हुए और शहीद भी अल्लाह के घर में ही हुए। अगर अली के दिखाए मार्ग पर थोड़ा भी चला जाए तो दुनियां और समाज में फैली अशान्ति समाप्त हो सकती है। इंसानों के बीच गैरबराबरी और नफरत की दीवार गिर सकती है। विगत 14 सदियों से रसूले अकरम और मौला अली को निरंतर याद किया जा रहा है लेकिन हम इन तारीखों के बीत जाने के बाद फिर अपने अंदाज़ में जीने लगते हैं। उक्त अवसर पर फरहत अब्बास, सरवर हुसैन जैदी, सज्जाद हुसैन रिजवी, अब्बास भाई, रेहान हैदर, जुल्फेकार हुसैन, अख्तर हुसैन, दिलवर हुसैन, इम्तियाज हुसैन, यासिर हुसैन, शेरू खान, बज्मी, अनवर हुसैन, जौवाद हुसैन आदि मौजूद थे।

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