75 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र सोहाँव बलिया पर हुआ ध्वाजारोहण कार्यक्रम एवं बृक्षारोपण

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75 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र सोहाँव बलिया पर हुआ ध्वाजारोहण कार्यक्रम एवं बृक्षारोपण

बलिया। 75 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र सोहाँव बलिया परिसर मे केन्द्राध्यक्ष प्रोफेसर (डा.) रवि प्रकाश मौर्य द्वारा ध्वाजारोहण किया गया। इस कार्यक्रम मे कोरोना कोबिद- 19 के गाइड लाइन का पालन करते हुए लोगों को जागरूक भी किया गया। प्रो. मौर्य ने इस अवसर पर बताया कि आजादी के बाद विभिन्न क्षेत्रों मे तरक्की के साथ -साथ कृषि शिक्षा, शोध मे बढोतरी हुई । शोध किये गये तकनीकियों का प्रचार प्रसार होने से नई तकनीक को किसानों ने अपनाया जिससें हम खाद्यान्न, सब्जी, फल, दूध . मत्स्य, आदि पर आत्म निर्भर हो सके। मशरूम उत्पादन , मधुमक्खी पालन कर रहे है। जहाँ पहले भुखमरी हुआ करती थी। आज सभी को भरपेट भोजन मिल रहा है। जहाँ कृषि कार्य मे खेत की तैयारी से लेकर कटाई तक हाथों से किया जाता था, मड़ाई बैलों से की जाती थी। काफी समय लगता था , आज मशीनीकरण का युग होने से कम खर्च एवं कम समय मे बुआई से लेकर मड़ाई तक का कार्य मशीन से हो जा रहा है। आज कीटो व रोगों की प्रबंधन के आधुनिक तरीकें आ गये है ,बिना कीटनाशकों के छिड़काव के फोरोमोन ट्रेप से एवं जैविक तरीकों से कीट नियंत्रण कर सकते है। अब बर्षा की भविष्य वाणी पहले ही हो जा रही है। कब वर्षा होगी किन किंन क्षेत्रो में होगी। मोबाइल, इण्टरनेट,गुग्गुल, विभिन्न एप के माध्यम से कृषि सम्बंधित सभी जानकारियां उपलब्ध है। प्रो. मोर्य ने बताया कि जब देश स्वतंत्र हुआ तो खाद्यान्न की पूर्ति हेतु अमेरिका से लार्मा गेहूँ व मक्का मगाया गया जो उस देश के सुअरों को खिलाने मे प्रयोग होता था। गेहूँ , मक्का दोनों की रोटियां कड़ी होती थी। स्वतंत्रता के कुछ समय बाद ,विभिन्न कृषि विश्वविद्यालय , कृषि शोध संस्थान, कृषि उद्योग खुले जिससे हरित क्रांति का जन्म हुआ। आज हम हर मामले मे आत्म निर्भर है। पूर्वांचल के कृषि विकास के लिये सन् 1975 में आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या की स्थापना हुई। जिसके द्वारा अभी तक 181 विभिन्न फसलों की प्रजातियां विकसित की गई है। जिसमें कहा जाता है।
बेल.आँवला, धान ।

यह है आचार्य नरेन्द्र देव विश्वविद्यालय की शान ।।
यह विश्वविद्यालय , 25 कृषि विज्ञान केन्द्रों. 4 कृषि ज्ञान केन्द्रों, 8 महाविद्यालयों, एवं 6 शोध केन्द्रों के माध्यम से पूर्वांचल के 26 जनपदों में महत्वपूर्ण योग दान दे रहा है।
प्रो. मौर्य ने वर्तमान में आयी बाढ़ पर चिन्ता ब्यक्त करते हुए बताया कि कृषि एवं कृषि से जुडे़ कार्य बहुत बुरी तरह प्रभावित हो गये है, इसमें केन्द्र द्वारा जो भी तकनीकी जानकारी होगी, उसको किसानों के बीच विभिन्न माध्यमों से प्रचार प्रसार किया जायेगा। यह डा. मौर्य का सेवा में रहते हुए आखिरी ध्वाजारोहण रहा है। 36 बर्षों की सेवा के बाद 62 बर्ष की अधिबर्षता आयु पूर्ण होने के उपरांत 30 नवम्बर 2021को कृषि विश्वविद्यालय की सेवा से सेवानिबृत होगे।

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