मैदाने ख़ुम में उत्तराधिकारी घोषित किए गए थे मौला अली

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मैदाने ख़ुम में उत्तराधिकारी घोषित किए गए थे मौला अली


अंबेडकरनगर। जनपद में ईद-ए-गदीर का त्योहार हर्षोल्लास के साथ कोविड -19 गाइडलाइन का पालन करते हुए मनाया गया। इस्लामी कलेंडर के अनुसार शुक्रवार 18 जिलहिज सन 10 हिजरी के दिन पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब ने मौला अली को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। इसी के साथ दीने इस्लाम मुकम्मल हुआ था।‌ इमामबारगाह मीरानपुर में अन्जुमन गुन्चे अकबरिया द्वारा सचिव यासिर हुसैन, कमर अब्बास, जैगम अब्बास, रेहान हैदर, वसी रज़ा, अख्तर, शुजाअत, समीर, जियो इत्यादि की देखरेख में महफिल का आयोजन किया गया। जिसमें शायरों ने एक से बढ़कर एक कलाम प्रस्तुत किये। महफिल का संचालन जैबी रिजवी, रेहान अकबरपुरी व इफ्तेखार हुसैन ने किया। अयोध्या से आये शायर हसन वास्ती, साजिद अशरफ व स्थानीय लोगों ने हजरत अली की शान में कलाम प्रस्तुत कर उपस्थित जनों को भावविभोर कर दिया। नारे तकबीर, नारे रिसालत वह नारे हैदरी के जयघोष से फिजा गूंज उठी। मौलाना मोहम्मद अब्बास रिजवी, मौलाना अकबर अली वाएज और मौलाना मोहम्मद असगर शारिब ने विचार व्यक्त करते हुये कहा ईदे गदीर, ईदे अकबर यानी सबसे बड़ी ईद है। मौलाना मोहम्मद अब्बास रिजवी ने आठवें इमाम अली रिजा अलैहिस्सलाम के हवाले से कहा गदीर की तबलीग वाजिब है। जो शख्स गदीर का सम्मान करेगा खुदा उसकी खताओं को माफ कर देगा। ईदे गदीर इबादतों, आग से हजरत इब्राहीम के निजात, दीन की तकमील, गमों को दूर करने, इल्म में इजाफा करने, बड़ी खुशखबरी, नए लिबास पहनने, मुहब्बत जाहिर करने, दुआ कुबूल होने, मोमिनों के लिए राहत तथा पाप से दूर रहने हेतु दृढ़ निश्चय का दिन है।

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