सत्य का बोलबाला का़यम किया पैग़ंबर साहब ने : रिज़वान जै़दपुरी

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सत्य का बोलबाला का़यम किया पैग़ंबर साहब ने : रिज़वान जै़दपुरी


अंबेडकरनगर। दुनिया हक को पहचाने, दीन का चर्चा हो, बेदीनी खत्म हो, ईमान की रोशनी आम हो और अंधविश्वास व सामाजिक कुरीतियां मिट जाए यह पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब की प्राथमिकता थी।
बाराबंकी से आये मौलाना सैयद अली रिजवान जैदपुरी ने इमामबाड़ा मीरानपुर में तीन दिवसीय वार्षिक मजलिस कार्यक्रम के अंतिम दिन सोमवार की रात्रि में समाजसेवी के रूप में पहचान रखने वाले डाक्टर सैय्यद मोहम्मद हसन आदि के पुण्य के लिये संबोधित किया। उन्होंने कहा कि रसूले पाक ने लोगों की भलाई तथा शरीयत को लागू करने में कोई कसर नहीं छोड़ा। खुदा वंदे आलम ने पहले ही घोषणा कर दिया था कि मैं छिपा हुआ खजाना था जब मैंने चाहा की पहचाना जाऊं तो अपने ही नूर से बंदे को खल्क किया। मेरा नाम महमूद था मैंने उस बंदे का नाम मोहम्मद रखा। मौलाना अली रिजवान ने यह भी कहा कि मेरे नबी का संसार में आने का उद्देश्य ही यही था कि अल्लाह पहचाना जाये, असत्य का नाश और सत्य का बोलबाला हो। यह विडंबना ही है कि नबी-ए-करीम को चालीस वर्ष तक मौन धारण करना पड़ा। जब अल्लाह ने मारिफत के लिए अपने इस नबी के नूर को खल्क किया तो जमाने में कुछ भी न था। अतः यह साबित है कि सम्पूर्ण श्रृष्टि की रचना पैगंबर मोहम्मद साहब के उपलक्ष्य में हुई यानी मोहम्मद न होते तो कुछ भी न होता। उन्होंने अंत में इस्लामी इतिहास के प्रथम बलिदानी हजरत मुस्लिम इब्ने अकील की चर्चा कर माहौल को गमगीन कर दिया।

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