लॉक डाउन में पाल्यो के हाथ पीले करना बना बड़ा सवाल ! पेट और पीठ दोनों पर पड़ रहें हैंं कोड़े ….

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लॉक डाउन में पाल्यो के हाथ पीले करना बना बड़ा सवाल ! …

पेट और पीठ दोनों पर पड़ रहें हैंं कोड़े ….

जमाखोरी व कालाबाजारी चरम पर ….प्रशासन बना मौन समर्थक …

विजय चौधरी / सह संपादक

अम्बेडकरनगर। सहालग के इस मौसम में लॉक डाऊन के चलते अविभावको को दोहरी मार का सामना करना पड़ रहा है ।
ज्ञात हो कि इन दिनों सहालग का मौसम चल रहा है । ऊपर से ग्रामीण आंचल में भी पांव पसार चुके कोरोना के भय से ग्रामीण काफी सहम सा गया है । जिन्दगी वैसे भी अनिश्चितता मुहाने पर आ खड़ी है । ऐसे में अविभावको अपने पाल्यो के हाथ पीला करना एक दुरूह कार्य हो चला है । एक तरफ प्रशासन के बंदिशों का नित नये एड्वाजरी का फ़रमान दूसरी तरफ सेठ साहूकारों का मंहगे दाम वसूली बेलगाम हो चली है । जिससे अविभावको के पीठ व पेट दोनों पर कोड़े बरसाये जा रहें हैंं ।
पाल्यो के हाथ पीले करना प्रशासन व शासन को भले ही हंसी खेल लगता हो , पर हर माँ -बाप अपनी जिन्दगी की सारी कमाई , धन , सम्मान व अरमान अपने पुत्र व पुत्री की खुशहाल दाम्पत्य के लिए न्यौछावर कर दांव पर लगाने से नहीं चुकता । जिसकी तैयारी एक दिन हरगिज़ पूरा नहीं किया जा सकता ।
पर आज वह एक बहुत ही भयावह दौर से गुजरने को मजबूर हो चला है । स्थानीय प्रशासन की अक्षमता का ही नतीजा है आज जब किसान वैवाहिक खरीददारी करने बाजारों में पहुंच रहा है तो खुदरा विक्रेता उससे लॉक डाउन की दुहायी देकर दूना चौगुना कीमत वसूल कर उसके पेट पर लात मार रहा है वहीं दूसरी तरफ स्थानीय प्रशासन बेरहमी से पिटायी कर रही । यदि प्रशासन की नीयत साफ़ व सुरक्षा की है तो उसे वैवाहिक कार्यक्रम पर पूर्ण विराम लगा देना चाहिए कमसेकम देश की जनता लुटने व पिटने से बच सके ।
आक्रोशित जनता ने प्रशासन से बाजारों में व्याप्त जमाखोरी व ब्लैक मार्केटिंग से निजात दिलाने की मांग की है ।

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