किसानों ने अपनी समस्या को लेकर प्रधानमंत्री से लगाई न्याय की गुहार

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किसानों ने अपनी समस्या को लेकर प्रधानमंत्री से लगाई न्याय की गुहार

भीटी अंबेडकरनगर। जहां एक तरफ सरकार किसान सम्मान निधि की आठवीं किस्त देने की तैयारी कर रही है वहीं तमाम किसानों का खाता नंबर गड़बड़ होने के कारण उन्हें किस्त मिलने की कोई आशा नहीं है। इससे उन किसानों में गहरी निराशा है। और साथ-साथ पोर्टल बंद होने के कारण लोग नया रजिस्ट्रेशन भी नहीं करवा पा रहे हैं। इससे किसान बहुत परेशान है। किसानों ने जिलाधिकारी अंबेडकरनगर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की है कि किसान पोर्टल शीघ्र चालू कराया जाए और किसानों को किसान सम्मान निधि की समस्त बकाया किस्त दे दी जाएं।


उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के जरिए किसानों की मदद के लिए सरकार दो ₹2000 की साल में तीन किस्त किसानों को दे रही है लेकिन फरवरी 2020 में शुरू हुई इस योजना में शुरू से ही रजिस्ट्रेशन करवाएं हुए तमाम किसानों को आज तक एक भी किस्त का पैसा नसीब नहीं हुआ जबकि उनकी किस्तों का पैसा दूसरों के खाते में चला गया बार-बार प्रार्थना पत्र देने और समस्त कागजात उपलब्ध कराने के बाद भी इन तमाम किसानों को एक भी पैसा नहीं मिला इससे किसानों में गहरा आक्रोश है। फरवरी 2020 के बाद मृत हुए किसानों के परिजनों को किसान पोर्टल रजिस्ट्रेशन बंद होने के कारण किसान सम्मान निधि का लाभ मिलने की संभावना दिखाई नहीं पड़ रही है। इससे इन किसानों में गहरा आक्रोश है। किसानों का कहना है कि सरकार उन लोगों के साथ भेदभाव कर रही है।किसी को तीन किसी को चार किसी को 5 किसी को 6 तो किसी को 7 किस्त दी गई है। लेकिन तमाम किसान ऐसे भी हैं जिनका शुरू से पंजीकरण हुआ है उसे आज तक एक भी किस्त नसीब नहीं हुई और सरकार द्वारा इस मामले में कोई ठोस कदम अभी तक नहीं उठाया गया जिससे किसानों में बहुत ही गहरा आक्रोश है । क्षेत्र के किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश योगी आदित्यनाथ जिलाधिकारी अंबेडकरनगर से मांग की है कि सभी जन सेवा केंद्र पर पंजीकरण में हुई त्रुटियां ठीक कराने की व्यवस्था करायें और नए किसान पंजीकरण जनसेवा केंद्रों पर कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करें। जिससे किसान सम्मान निधि का लाभ सभी पात्र किसानों को दिया जाए। जिससे वह सभी किसानों के समान सरकार की योजना का लाभ उठा सकें और अपने कृषि कार्यों को इन पैसों की सहायता से आगे बढ़ा सके।

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