युवा पीढ़ी की बदलती सोंच

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युवा पीढ़ी की बदलती सोंच

लखनऊ। आज से कुछ साल पहले जहां किसी शराब की दुकान के बाहर कोई युवा नजर भी आ जाता था तो उससे ढेरों सवाल पूछे जाते थे और आज के दौर में युवा पीढ़ी के एक हिस्से के लिए बीयर बार में जाना फैशन का एक हिस्सा बन चुका है। मेट्रो सिटी के युवा पढ़ लिख कर मल्टीनेशनल कंपनियों में अच्छी खासी नौकरी कर रहे हैं और उस पैसों को अपनी मस्ती के लिए खर्च कर रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि आज की युवा पीढ़ी बिंदास है लेकिन युवा पीढ़ी किस दिशा में जा रही है यह चिंतन का विषय है। आप किसी पार्टी या बार में चले जाइए वहां आपको ज्यादातर युवा नजर आएंगे।

अगर आप उनसे पूछते हैं कि क्या उनके माता-पिता को इस बारे में पता है तो वह ना में ही जवाब देंगे। जी हां युवा पीढ़ी अपने पैरों पर खड़ी होने के बाद अपने हर फैसले खुद करती है। इसके अलावा लखनऊ मुंबई कानपुर बेंगलुरु जैसे बड़े-बड़े शहरों में युवा अपने रिश्तो को लेकर भी पहले से ज्यादा मुखर हुए हैं। वह डांस पार्टी मस्ती फैशन मूवी और रिलेशन जैसी चीजों पर खुलकर बोलते हैं। आज मेट्रो सिटी में छोटे शहरों के कई युवा जॉब करने आते हैं। और यही बस जाते हैं। अच्छी तनख्वाह के कारण वह अपने खर्चे भी बढ़ाते हैं। माता-पिता से दूर होने के कारण उन्हें कोई ज्यादा टोकने वाला भी नहीं होता। लड़कों के साथ आज के दौर में लड़कियों ने भी वहीं राह पकड़ ली है। लड़कियां भी मल्टीनेशनल कंपनियों में काम कर रही है। और वे आजाद हैं। पूर्वोत्तर से लेकर नई दिल्ली में जॉब करने आई सुशीला शुरू में काम करने में हिचकिचाती थी। पर आज वह लिव इन रिलेशनशिप को भी सहजता से स्वीकार करती है। जीवन की भाग दौड़ में अगर साथ पढ़ाई करने या काम करने वाला पुरुष मित्र साथ रहने लगता है तो वह इसे अपनी सुरक्षा के लिहाज से भी उचित मानती हैं। इस सब में कहीं भी अपराध बोध नजर नहीं आता। टेलीविजन और फिल्मों के प्रभाव के कारण आज के युवा अपना साथी बदलने में भी गुरेज नहीं करते हैं। इस पीढ़ी को देखकर कई किशोर युवक-युवती भी समय से पहले ही अल्कोहल की लत के शिकार होने लगे हैं। समाज शास्त्रियों का इस बारे में मानना है कि युवाओं को हर फैसला अपने विवेक से लेना होगा। किसी से प्रभावित होने की वजह अगर युवा पीढ़ी अपना दिमाग इस्तेमाल करेगी तो अच्छी तरह चीजों को हैंडल कर पाएगी। शानदार नौकरी और ज्यादा तनख्वाह के बीच माता-पिता की भी कुछ अपेक्षाएं हैं जिन पर युवाओं को खराब करना है।

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