फर्जी मार्कशीट धारी अध्यापकों से दी जा रही है संस्कृत स्कूल में शिक्षा …

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फर्जी मार्कशीट धारी

अध्यापकों से दी जा रही है

संस्कृत स्कूल में शिक्षा …

लखनऊ। सूबे में भारतीय जनता पार्टी की सरकार जब से आई है। तभी से भ्रष्टाचार को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ काफी सक्त रुख़ अख्तियार किये हुए हैंं । भ्रस्टाचारी पर नकेल कसना शुरू कर दिया गया है। फिर भी अंबेडकर नगर जनपद में कई संस्कृत विद्यालयों में फर्जी मार्कशीट के आधार पर नौकरी करने का मामला प्रकाश में आया है । साथ ही साथ शहर से लेकर गांव के चौपालो तक इस प्रसंग की चर्चा तेज हो चली है कि आखिर मुख्यमंत्री जी का ध्यान इन फर्जी डिग्री के सहारे सरकारी खजाना से कई हजार रुपया मासिक लेने वाले शिक्षकों पर विराम कब लगाई जाएगी ? जन चर्चा और सूत्रों पर भरोसा करें तो कटेहरी विधानसभा क्षेत्र के कुछ विद्यालय में फर्जी शिक्षक राजकोष से वेतन प्राप्त कर रहे हैं। इसकी शिकायत कई बार शासन स्तर तक पहुंची लेकिन उक्त कृत्य में सफेदपोशों के शामिल होने के कारण विभागीय कार्यवाही ठंढे बस्ते में डाल दी जाती रही । सूत्र बताते हैंं कि एक ऐसी महिला भी सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत है। जो स्नातक भी नहीं है फिर भी वह तथ्य गोपन कर अध्यापक बनी धड़ल्ले से सरकारी सेलरी ले रही है ।

जिसकी चर्चा जोरों पर है । कि सूबे के मुख्यमंत्री का तरफ जहाँ भ्रष्टाचार पर हंटर चल रहा है वहीं जनपद के फ़र्जी अध्यापक पर कार्यवाही क्यों नहीं हो पा रही है ? आखिर किसकी मेहरबानी बरस रही है इस सफेदपोश अध्यापक पर ? शिकायतकर्ता अवकाश प्राप्त प्रधानाचार्य राजेंद्र प्रसाद पाण्डेय ने बताया कि उक्त प्रकरण की कई बार लिखित शिकायत प्रेषित की गयी । पर जब कार्रवाई के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में पत्र पहुंचता है । तो यहां पर आकर रफ्तार धीमी पड़ जाती है । इतना ही नहीं नाम न छापने की शर्त पर कई समाजसेवियों ने बताया की संस्कृत विद्यालयों में अगर सही रूप से जांच कराई जाए तो एक तरफ जहाँ मानक से ज्यादा अध्यापक कार्यरत हैं वहीं कई की अध्यापकों की डिग्री ही अपूर्ण है। परंतु हर महीने सरकारी धन वेतन के रूप में खर्च हो रहा है। जबकि कई दूरदराज के क्षेत्र में ऐसे विद्यालय हैं । जहां छात्र ही नहीं , शिक्षक भी विद्यालय में नहीं पहुंचते हैं । सिर्फ प्रतिदिन उनके हस्ताक्षर फर्जी तरीके से बन जाते हैं । वेतन का भुगतान निर्बाध रूप में चलता रहता है। ऐसा मामला कटेहरी विधानसभा में व जनपद के अन्य क्षेत्रों में भी निर्विघ्न रूप से संचालित किये जा रहें हैंं । जो प्रमुखता से संस्कृत विद्यालयों में देखने को मिलता है। हमारे संवाददाता को संस्कृत विद्यालयों से जुड़ी बहुत सी जांचें प्राप्त हो चुकी हैं।

 

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