अंगद के पैर बने जमें हैंं डी एम , सी डी ओ व सी एम ओ के स्टोनो ….

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अंगद के पैर बने जमें हैंं डी एम , सी डी ओ व सी एम ओ के स्टोनो ….

आखिर इन रसूखदार बाबुओं पर कार्यवाई से क्यों बचते हैंं हाकिम ?

प्रभावित हो सकती है आसन्न पंचायती चुनाव प्रक्रिया …

शासनादेश के विपरीत सभी बाबुओं के कार्यालय वातानुकूलन से सजे पड़े हैंं नहीं पड़ती हाकिम नजर …

विनोद वर्मा / विजय चौधरी 

अम्बेडकरनगर। सूबे की हूकूमत एक तरफ जहाँ भ्रस्टाचार को समूल नष्ट करने की कमर कस चुकी है । वहीं जनपद मुख्यालय के पटल पर हुकूमत के समानांतर बाबुओं की हुकूमत चल रही है । स्थित यह है कि छोटी सी सेलरी में एक ही पटल पर दो दशकों से अधिक समय कार्यरत इन बाबुओं के अकूत धन , वैभव व विलासितापूर्ण जीवनशैली ए श्रेणी के अधिकारियों को भी मात देरही है । शासनादेश के विपरीत सभी बाबुओं के कार्यालय वातानुकूलन से सजे हैंं । पर अंगद के पैर बने इन बाबुओं की धमक जनपद से लेकर राजधानी तक दिखायी देने लगी है । राजधानी लखनऊ में भी इनकी बहुमंजिला पत्थर के मकान इनके गाढ़ी कमाई की गवाही दे रहें हैंं । इनकी पकड़ इतनी मजबूत हो चली है कि अब तो इनके हाकिम स्वयं इनपर कार्यवाई करने से बचते नजर आने लगें हैंं । जबकि सरकार द्वारा जारी किये गये एक पटल पर कार्यरत समय सीमा भी जनपद में तैनात जिलाधिकारी के स्टोनो , मुख्य विकास अधिकारी के स्टोनो एवं सी एम ओ के दो बाबू बहुत पहले बिता चुकें हैंं । फिर भी जिलाधिकारी , सी डी ओ , सी एम ओ बदलते रहतें पर इन बाबुओं का पटल दो दशकों से अधिक समय से वहीं का वही बना हुआ है । पहलें से ही विवादों से घिरा सी डी ओ का स्टोनो कई ग्राम पंचायतों के विकास को प्रभावित करने की धमकी देने वाला आज भी उसी पटल पर आधिपत्य जमाये हुए बैठा है । जिस के द्वारा आसन्न पंचायती चुनाव को प्रभावित करने का प्रबल आशंका लोगों द्वारा अभी से व्यक्त किये जाने लगे हैंं । आरक्षण की डील के दावे भी उठने लगें हैंं । जहाँ पटल परिवर्तन के कानून इनके रसूख के सामने नतमस्तक हो रहें वहीं नवागत हाकिम भी इनपर इतना मेहरबान हैंं कि उनपर किसी कार्यवाही की हिम्मत नहीं जुटा पा रहें हैंं ?
आखिर इन बाबुओं पर कब होगी कार्यवाही यह अभी भी भविष्य के गर्भ में है ।

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