आख़िर हमेशा हुकूमत के ही दहलीज़ पर क्यों दम तोड़ती नज़र आती है कोरोना की सुरक्षा

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आखिर हमेशा हुकूमत के ही दहलीज़ पर क्यों दम तोड़ती नज़र आती है कोरोना की सुरक्षा …

महाराणा प्रताप के प्रतिमा के अनावरण के बहाने प्रदेश के कानून मंत्री द्वारा जमकर उड़ाई गयी सोशल डिस्टेंस की धज्जियां …

जाते जाते जिला पंचायत अध्यक्ष ने भी अपने सानिध्य में उड़ाया कोरोना का मखौल ….

विनोद वर्मा सम्पादक 

अम्बेडकरनगर। एक तरफ कोरोना को लेकर प्रदेश व सूबे की सत्ता द्वारा जमकर प्रचार प्रसार किया जाता रहा । यहाँ तक कि इसे महामारी के श्रेणी में भी लाकर खड़ा कर दिया गया । पर यह क्या विडम्बना है कि इसके सारे नियम व शर्तें हुकूमत के शागिर्दों पर फिट नहीं हो रही है ? क्योंकि एक तरफ जहाँ प्रशासन कोरोना की गम्भीरता को लेकर अन्य दलों को कार्यक्रम की अनुमति तक नहीं प्रदान करती । यदि कोई इसकी अवहेलना में लिप्त पाया गया तो उसके खिलाफ़ विधिक कार्यवाही की गयी । पर वहीं दूसरी तरफ़ हुकूमत के नुमाइंदों द्वारा खुलेआम इसकी धज्जियां उड़ायी जाती रही और प्रशासन भी मूकदर्शक बन इसके साक्षी बने हुए हैंं । यहीं कोरोना की गम्भीरता को लेकर जनता के बीच संशय पैदा कर रहें हैंं ।


ऐसा ही एक उदाहरण जनपद के जिला पंचायत परिसर में सत्र के अंतिम दौर में 13 जनवरी को महा राणा प्रताप की प्रतिमा के अनावरण के बहाने देखने को मिला । जिसमें सूबे के कानून मंत्री द्वारा ही कानून की परखच्चे किये गये । जिसकी अन्तिम एक दिन के लिए शेष बचे जिला पंचायत अध्यक्ष के द्वारा अध्यक्षता भी गयी । इस आयोजन में जनपद स्तरीय हुकूमत से जुड़े अन्य लोग भी मौजूद रहे । भोलीभाली जनता ज़ेहन में यह सवाल बार बार कौंधता है कि आखिर हुकूमत द्वारा बनाये गये वसूलो को हकूमत के नुमाइंदों द्वारा ही हमेशा रौंदा क्यों जा रहा है ? आखिर कोरोना इनका सुरक्षा कवच है या सत्ता की सनक !

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