विभाजन के दर्द को भुलाया नहीं जा सकता : प्रो. मिथिलेश सिंह

1 min read

विभाजन के दर्द को भुलाया नहीं जा सकता – प्रो. मिथिलेश सिंह

वाराणसी। आजादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत श्री अग्रसेन कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भारत विभाजन विभीषिका दिवस के अवसर पर क्या भारत विभाजन अनिवार्य था इस विषय पर वाद विवाद प्रतियोगिता व पोस्टर प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। जिसमें छात्राओं अनुकृति, विशाखा ,तनु ,प्रतीक्षा ,आस्था ,सादमी ने क्या विभाजन अनिवार्य था इस विषय पर अपने विचारों को रखा। समाजशास्त्र की विभागाध्यक्ष डॉ आभा सक्सेना ने अपनी स्मृतियों के माध्यम से विभाजन की त्रासदी की याद दिलाई तथा सामाजिक भेदभाव को भुलाकर सामाजिक समरसता की ओर बढ़ने का संदेश दिया। महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर मिथिलेश सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि देश का विभाजन चाहे जिस कारण से हुआ हो उसके दर्द को भुलाया नहीं जा सकता । यह दिवस आत्म चिंतन और आत्ममंथन का है कि क्या आजादी के 75 साल बाद भी हम धर्म, जाति, संप्रदाय से ऊपर उठकर समाज व राष्ट्र के विकास में अपना योगदान दे रहे हैं ।कार्यक्रम का संचालन इतिहास विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर तथा महाविद्यालय के आजादी के अमृत महोत्सव की सह समन्वयक डॉ नंदिनी पटेल ने किया ।कार्यक्रम में डा अनीता सिंह, डा आकृति मिश्रा, डा सरला सिंह, डा सुमन सिंह,श्रीमती शोभा प्रजापति, डा शशी बाला, डा आराधना श्रीवास्तव, डा विभा सिंह, डा प्रतिभा, डा मेनका सिंह, डा सीमा अस्थाना, डा नीलू गर्ग,लेफ्टिनेंट उषा बालचंदानी, डॉ ओपी चौधरी ,डॉ परितोष प्रसादभट्टाचार्य ,निधि बाजपेई, डा उषा चौधरी,अर्चना शर्मा आदि सहित छात्राएं उपस्थित थीं।इससे पूर्व प्रातः 9 बजे राष्ट्रध्वज फहराया गया। इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष व महाविद्यालय के आजादी का अमृत महोत्सव के समन्वयक डॉ दुष्यंत सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

शोभा प्रजापति
सह मीडिया प्रभारी
श्री अग्रसेन कन्या पी जी कॉलेज वाराणसी।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

कॉपीराईट एक्ट 1957
के तहत इस वेबसाईट
पर दी हुई सामग्री को
पूर्ण अथवा आंशिक रूप
से कॉपी करना एक
दंडनीय अपराध है

(c) अवधी खबर -
सर्वाधिकार सुरक्षित