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मौला अली की सादगी, न्याय और साहस भरी जिंदगी पर डाली रौशनी

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मौला अली की सादगी, न्याय और साहस भरी जिंदगी पर डाली रौशनी

अंबेडकरनगर। इस्मत की बारगाह का पर्दा पड़ा हुआ, दो चीज एक साथ तो खाई नहीं कभी, है खौफ दिल से खौफे खुदा भी मिला हुआ शीर्षक से नौहा पढ़ा गया तो अजादारों के नेत्रों से अश्रु की धारा बहने लगी। मौलाये कायनात इमाम अली की याद में इमामबाड़ा मीरानपुर से अंजुमन अकबरिया की देखरेख में निकले 21वीं रमजान के सालाना मातमी जुलूस में रजा अनवर, दानिश अली, असरार, बादशाह, चंदन आदि नौहाखानी किया। भोर में निकला उक्त जुलूस साढ़े आठ बजे फातमेन-करबला पहुंचा जहां मौलाना जाफर ने अलविदाई तकरीर किया। अंजुमन के अध्यक्ष रेहान जैदी ने सहयोग के लिए जिला व पुलिस प्रशासन का धन्यवाद ज्ञापित किया। हाजी सज्जाद हुसैन, सरवर हुसैन जैदी, अधिवक्ता शुजाअत हुसैन, अख्तर हुसैन, तनवीर हुसैन, रियाज हुसैन, अय्यूब खान, मेहदी हसन, मेहदी रजा, यासिर हुसैन, अहमद हुसैन बब्बी आदि उपस्थित थे। उधर मोहल्ला गदायां में अंजुमन पंजतरनी के पदाधिकारी हैदर मेहदी जैगम, अनीस, कर्रार, शोऐब के नेतृत्व में निकले मातमी जुलूस के मध्य मौलाना जफर अली रिजवी ने मजलिस पढ़ी। अब्दुल्लाहपुर, में अंजुमन हैदरिया, लोरपुर में अंजुमन हुसैनिया, ताजपुर में अंजुमन हैदरिया, कजपुरा में अंजुमन जाफरिया की अगुवाई में जुलूस निकले जिसमें जाकिरीन ने मौला अली की सादगी, न्याय और साहस भरी जिंदगी पर रौशनी डाला।

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