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परवर दिगार अपने बंदों के गुनाहों को ज़रूर माफ़ करेगा : मौलाना शारिब

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परवर दिगार अपने बंदों के गुनाहों को ज़रूर माफ़ करेगा : मौलाना शारिब

अंबेडकरनगर। रमजान अरबी कैलेंडर के उस नवें महीने का नाम हैं जिसमें संपूर्ण विश्व के मुसलमान रोजा रखते हैं। माहे रमजान को दस दस दिन के तीन भागों में विभाजित किया गया है जिसे अशरा कहते हैं। पहला अशरा एक से दस रमजान तक रहमत वाला, दूसरा अशरा ग्यारह से बीस तक मगफिरत वाला और तीसरा अशरा इक्कीस से तीस रमजान तक जहन्नुम की आग से बचाव का माना जाता है।
पवित्र रमजान का पहला अशरा मंगलवार को पूरा हुआ और मगफेरत वाले दूसरे अशरे का आगाज बुधवार से है।
नगर के मोहल्ला हुसैनाबाद-लोरपुर स्थित मस्जिद के पेश इमाम मौलाना सैयद शबाब हैदर के मुताबिक मगफेरत का यह दूसरा अशरा बहुत ही महत्वपूर्ण है। वे आगे कहते हैं, उन लोगों के लिए अभी भी बेहतरीन अवसर है जो किन्हीं कारणों से रोजा रखने से वंचित रह गए हों। वहीं मस्जिद कदम रसूल लोरपुर के पेश इमाम मौलाना सैयद मोहम्मद असगर शारिब का कथन है इस दूसरे अशरे में रोजेदार अल्लाह तआला से मगफेरत तलब करेंगे। इन दिनों में रोजेदारों को अपने गुनाहों की अधिकाधिक माफी मांगनी चाहिए। परवर दिगार अपने बंदों के गुनाहों को जरूर माफ करेगा। रब तो बंदों के गुनाह माफ करने के बहाने तलाश करता है। प्रत्येक अशरे में अल्लाह पाक अपने बंदों पर रहमत की वर्षा करता है। रमजान के महीने में रहमत के दरवाजे खुल जाते हैं। गुनाहगारों की तौबा कुबूल की जाती है।
क्या करें इस अशरे में :
लतीफिया मस्जिद मीरानपुर के पेश इमाम मौलाना अकबर अली मिस्बाही कहते हैं मगफिरत के दूसरे अशरे में अस्तगफिरुलल्लाह रब्बी वातूबो इलैह पढ़ें, अल्लाह पाक की इबादत करें और ज्यादा से ज्यादा कुरान मजीद का पाठ करें। इसके अतिरिक्त भूखों को खाना खिलाएं, रोजेदारों को इफ्तार कराएं एवं पात्रों को दान करें। अंत में उन्होंने कहा अजब खुशबू लुटाती है सदाएं रोजादारों की, खुदा भी खूब सुनता है दुआएं रोजादारों की।

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