एआरटीओ कार्यालय में अफसरों की हुकूमत नहीं, बल्कि दलालों की फटकार चलती है……

1 min read

एआरटीओ कार्यालय में आर आई के दलाल रिश्तेदारों द्वारा होता है अवैध वसूली

एआरटीओ कार्यालय में अफसरों की हुकूमत नहीं, बल्कि दलालों की फटकार चलती है……

अम्बेडकरनगर। उप संभागीय कार्यालय में आवेदकों को बाबू से पहले आर आई के दो दलाल रिश्तेदारों से संपर्क करना पड़ता है। ड्राइविंग लाइसेंस, परमिट, फिटनेस संबंधित काम करवाने के लिए पहुंच रहे हजारों आवेदकों से इन दो दलालों द्वारा कई गुना अधिक पैसा वसूला जा रहा है।

उप संभागीय कार्यालय में अफसरों की हुकूमत नहीं, बल्कि दलालों की फटकार चलती है। उप संभागीय कार्यालय में डायरेक्ट आने वाले आवेदकों को बाबू के पहले दलालों के संपर्क करना पड़ता है। यहां ड्राइविंग लाइसेंस, परमिट, फिटनेस संबंधित काम करवाने के लिए पहुंच रहे हजारों आवेदकों से दलालों द्वारा दोगुना पैसा वसूला जा रहा है।
उप संभागीय कार्यालय में दलालों की इतनी तूती बोलती है कि वे बाबूओं के बाजू में कुर्सी लगाकर बैठे रहते हैं। एक आवेदक ने बताया कि ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए परिवहन अधिकारी नहीं, बल्कि कार्यालय के भीतर बैठे आर आई के दो दलालों से मिलना पड़ता है। इन दलालों द्वारा फर्जी दस्तावेज और मेडिकल प्रमाण पत्र भी बनाए जाते हैं और धड़ल्ले से लाइसेंस आवेदन के लिए लगाए भी जाते है। परिवहन अधिकारियों को दलालों की कारगुजारी पता होने के बावजूद इन सबको नजरअंदाज किया जा रहा है। यहांं आने वाले आवदकों का कहना है कि एआरटीओ में दलाल भी अब सिस्टम का अंग बनकर काम कर रहे हैं। यहां तक कि सरकारी सीटों पर भी दलालों का कब्जा है, लेकिन एआरटीओ अधिकारी जानकर भी अंजान बने हुए हैं।
वहीं एआरटीओ अधिकारी का कहना है कि उन्होंने किसी एजेंट को अधिकृत नहीं किया है और जो आवेदक दलालों के माध्यम से लाइसेंस बनवाते हैं, तो यह उनकी स्वेच्छा है। उन्होंने कहा कि एआरटीओ परिसर में किसी भी एजेंट को स्थान नहीं दिया गया है। जो एजेंट परिवहन संबंधी काम करते हैं, वे अपनी जगह बैठते हैं और उनके पास एजेंटों को हटाने का कोई हक नहीं है।आज आपके द्वारा जानकारी मिल रही है। यह जांच का विषय है। हम आपको आश्वासन देते है यदि ऐसा हो रहा है तो इनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

कॉपीराईट एक्ट 1957
के तहत इस वेबसाईट
पर दी हुई सामग्री को
पूर्ण अथवा आंशिक रूप
से कॉपी करना एक
दंडनीय अपराध है

(c) अवधी खबर -
सर्वाधिकार सुरक्षित