भारतीय संस्कृति और ज्ञान का अनुपम उपहार है योग : डा दुष्यंत सिंह

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वाराणसी। श्री अग्रसेन कन्या पीजी कॉलेज वाराणासी के परमानंदपुर परिसर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन बड़े धूम धाम से किया गया। आजादी के अमृत महोत्सव एवम मिशन शक्ति के संयुक्त तत्वावधान में शारीरिक शिक्षा विभाग द्वारा सप्ताह व्यापी अमृत योग सप्ताह (14 से 20 जून, 2022) का आयोजन किया गया। देश की आध्यात्मिक राजधानी काशी की पौराणिक, सांस्कृतिक तथा ऐतिहासिक विरासत में योग का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इसी कड़ी में एक लघु प्रयास आज महाविद्यालय में भी शारीरिक शिक्षा विभाग की अध्यक्ष डा मृदुला व्यास ने सभी शिक्षकों, कर्मचारियों एवम छात्राओं को योग के विभिन्न आसनों का अभ्यास कराया साथ ही उसके लाभ भी बताए। सूक्ष्म व्यायाम से लेकर ताड़ासन,वृक्ष आसान,वज्रासन, हल आसान,भुजंग आसन आदि 24 आसनों का प्रशिक्षण एवम अभ्यास कराया। सभी को संबोधित करते हुए कि कोरोना काल में केवल भारत ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर सभी ने योग की महत्ता को स्वीकार किया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में आजादी के अमृत महोत्सव एवम मिशन शक्ति के समन्वयक प्राचीन भारतीय इतिहास विभाग के अध्यक्ष डा दुष्यंत सिंह ने मानवता के लिए योग थीम पर विस्तृत प्रकाश डाला। पतंजलि के अष्टांग योग यम,नियम,आसान,प्राणायाम,प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि का विवेचन प्रस्तुत किया और कहा कि “पतंजलि योग सूत्र”के मध्यम से योग की विभिन्न विधाओं का सुव्यवस्थित ज्ञान कराने में महत्वपूर्ण योगदान किया। अपने ओजपूर्ण वक्तव्य में डा सिंह ने कहा कि योग न केवल शरीर अपितु चित्तवृत्तियों का भी परिशोधन करता है। व्यक्ति ऊर्जावान होता है। सफल आयोजन हेतु महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो मिथिलेश सिंह ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अपने अध्यक्षीय उदबोधन में प्रधानमंत्री के प्रयास की सराहना करते हुए कहा की योग हमारी अत्यंत प्राचीन धरोहर है।बह्यवृत्ति से अंतःवृत्ति की ओर जाना ही योग है। हम नियमित रूप से योग करते हुए अपने शारीरिक स्वास्थ्य के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य को भी समुन्नत बना सकते हैं। दुनिया के अनेक देश आज जब इस भारतीय विधा योग के बहाने भारत से जुड़ते हैं तो गौरव बोध होता है,भारत बोध होता है। सह समन्वयक डा नंदिनी पटेल ने कहा कि योग स्वस्थ और प्रसन्न रहने के लिए अत्यंत प्रभावी विधि है। योग से शरीर स्वस्थ और मन विकार रहित होता है। धन्यवाद ज्ञापित करते हुए महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रशासन डा ओ पी चौधरी ने भारतीय ज्ञान परंपरा में योग एक अद्भुत अनुभव है,जिससे व्यक्ति की चेतना को विस्तार मिलता है। वह स्वयं को जानता है।भारत में योग की शुरुआत दस हजार वर्ष पूर्व हुई थी। अगस्त्य मुनि ने अपने देश में योग को सभी के जीवन का हिस्सा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर शिक्षक संघ की अध्यक्ष डा कुमुद सिंह,छात्रावास अधीक्षिका डा नीलू गर्ग,सह अधिष्ठाता प्रशासन डा जे पी शर्मा,सह मीडिया प्रभारी शोभा प्रजापति, डा निशा पाठक, डा शालिनी, डा दिव्या राय, डा दिव्या पाल, डा उषा चौधरी,श्रद्धा वर्मा,राम नरेश,माला खरे,बेबी गुप्ता,माधुरी,आराधना सिन्हा, शमशेर, मायाशंकर सहित रेंजर्स,स्पोर्ट्स के साथ ही अन्य छात्राएं भी उपस्थित रहीं। राष्ट्रगान और भारत माता की जय के उदघोष के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

डॉ ओ पी चौधरी
मीडिया प्रभारी

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