हैंडलिंग व परिवहन ठेकादार सिंगल स्टेज डोर स्टेप डिलीवरी ने धरना देकर 8 सूत्री मांगपत्र सौंपा

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अवधी खबर

लखनऊ। हैंडलिंग व परिवहन ठेकादार सिंगल स्टेज डोर स्टेप डिलीवरी के समस्त ठेकेदारों को कार्य करने में तमाम कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जिससे थक- हार व परेशान होकर ठेकेदारों ने खाद्य एवं रसद विभाग तालकटोरा, लखनऊ में धरना देकर अपनी 8 सूत्री मांग पत्र सौंपा। जिसमें ठेकेदारों ने अपनी तमाम समस्याओं का वर्णन करते हुए सरकार से अपनी समस्याओं के निराकरण हेतु उचित कार्यवाही की मांग करते हुए यह भी कहा है कि यदि उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जा सकता तो हम कार्य करने में असमर्थ हैं। ठेकेदारों तथा प्रतिनिधियों के साथ कैंप कार्यालय के अधिकारियों द्वारा अमर्यादित व्यवहार किया जाता है। शुकवार को ही ठेकेदार प्रतिनिधि विजय पाण्डेय के साथ विपणन निरीक्षक दिव्यान्शु सिंह द्वारा अमर्यादित रूप से व्यवहार किया गया। ऐसे व्यवहार किया मानों वो उनके जरखरीद गुलाम हों। प्रेषण प्रभारी द्वारा ठेकेदारों द्वारा किए गए कार्यों के बिलों पर हस्ताक्षर नहीं किया जा रहा है। शासनादेश के नाम पर यह कहकर रोका जाता है कि प्रत्येक परिवहन चालान (टीडी) पर पहले पूर्ति निरीक्षक द्वारा सत्यापित करवा कर लाओ तभी बिलों पर हस्ताक्षर किया जाएगा। जबकि जिला पूर्ति अधिकारी के कार्यालय से निर्धारित फॉर्मेट पर एफ़सीआई से निर्गत खाद्यान्न तथा कोटेदारों को प्राप्त खाद्यान्न की मात्रा सत्यापित करके संभागीय वरिष्ठ लेखाधिकारी के कार्यालय में प्रत्येक उठान के बाद प्रेषित किया जाता है। उक्त से ऐसा प्रतीत होता है
जानबूझकर ठेकदारों के परिवहन बिलों को रोका जा रहा है। जिस से समयबद्ध रूप से बिलों के भुगतान नहीं हो पा रहे हैं। परिवहन चालान में कोटेदार वार बोरों की संख्या औसत से भर जाती है और जब तौलकर खाद्यान्न कोटेदार को दिया जाता है तो बोरों की संख्या में अंतर होने पर वह उतारवाने से इंकार
करने लगता है। यदि बोरों कि संख्या भरी जाये तो ग्रुप के प्रत्येक कोटेदारों का खाद्यान्न अलग अलग तौल कराकर ट्रकों पर लोड कराई जाएँ अथवा एफ़सीआई से मानक वजन (50 किलोग्राम ) के बोरे गाड़ियों पर लोड कराये जाएं अन्यथा कोटेदार वार अलग- अलग बोरे लिखना अप्रासंगिक है।एफसीआई द्वारा कुछ दिनों तक तौल काँटा पर्ची दिये जाने के उपरांत अब बंद कर दी गयी। जिससे ठेकेदार को से प्राप्त खाद्यान्न का वजन प्रमाणिक रूप से नहीं प्राप्त हो पाता है। एफ़सीआई में लोडिंग के समय ट्रकों से डाला के नाम पर अवैध वसूली की जाती है जबकि शासनादेश के अनुसार सिंगल स्टेज में मात्र परिवहन तथा कोटेदार की दुकान पर अनलोड करने की ज़िम्मेदारी ठेकदार की है लोडिंग का उत्तरदायित्व एफ़सीआई का है फिर भी वाहनों को लोड
कराने का पैसा परिवहन ठेकदार को देना पड़ रहा है। इस अवैध धन उगाही को बंद कराने की माँग की है। शासनादेश के प्रस्तर संख्या 16 के अनुसार ठेकेदार लोडिंग के लिए अधिकतम 25% छोटे वाहन (9 टन क्षमता) उपयोग में ला सकेंगे किन्तु लोड होने के बाद प्रेषण प्रभारी द्वारा उनको
डिस्पैच करने से यह कहकर मना कर दिया जाता है की एक ग्रुप एक से अधिक वाहन नहीं लगाए जा सकते हैं। ऐसा लगता है कि प्रेषण प्रभारी द्वारा जानबूझकर उठान को बाधित करने की कोशिश की जा रही है।एफ़सीआई तालकटोरा नो इंट्री जोन में स्थित है वहाँ से बाहर निकलने के लिए तथा परिवहन करने के लिए नो इंट्री जोन से होकर गुजरना पड़ता है जिसके लिए प्रायः सभी वाहनों के चालान प्रतिदिन पुलिस द्वारा किया जा रहा है। जनपद बरेली की तरह नो एंट्री
जोन से परिवहन करने हेतु आदेश डीसीपी यातायात द्वारा निर्गत कराने जाने अथवा नो एंट्री चालान की माफी के लिए कोई आदेश करवाने की मांग की है। ठेकदारों के वाहन सुबह कितनी भी जल्दी एफ़सीआई के अंदर चली जाएँ उनकी निकासी शाम 8:00-9:00 बजे तक का समय लग जाता है। पहले लोडिंग में एफसीआई द्वारा अन्य एजेंसियों की वाहनों को लोडिंग में प्राथमिकता दी जाती है फिर गेट पास आने के बाद ऑनलाइन डिस्पैच के नाम पर परिवहन चालान देने में रात कर दी जाती है। उक्त समस्याओं का निराकरण करने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि अन्यथा की दशा में ठेकेदारों द्वारा कार्य किया जाना संभव नहीं हो सकेगा।इस मौके पर में. राजेश कुमार मेमर्स, में. शारदा रोड लाइन्स, संगम कंट्रक्शन, आदिसिद्धि बिजिनेस सोल्यूशन प्रा0 लि0, में. जय माँ अम्बे ट्रांसपोर्ट के मालिक उपस्थित रहे है।

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