मामता की ज़िंदगी है, इश्क की मंज़िल है मां…

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मामता की ज़िंदगी है, इश्क की मंज़िल है मां…

अंबेडकरनगर (अवधी खबर)। रसूल और आले रसूल को परवर दिगार ने हमारे लिए आइडियल बनाया। खुदा वंदे आलम ने बंदों को दो सिफात व कमालात अता किए हैं। जिनमें से एक उसकी योग्यता के परिणामस्वरूप तथा दूसरा ईश्वरीय वरदान होता है।

उक्त विचार लखनऊ से आए प्रख्यात आलिम-ए-दीन मौलाना सैयद हैदर अब्बास रिजवी ने व्यक्त किया। वह जलालपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम कोरझा में प्रधान मोहम्मद मोहसिन जाफरी की ओर से आयोजित मशहूर शायर सैयद मोहम्मद हसनैन ‘शरर’ की धर्म पत्नी मरहूमा सैय्यदा इमाम बांदी बिंते सैयद तुफैल हुसैन के चालीसवें की मजलिस को संबोधित कर रहे थे। आरिफ अनवर अकबरपुरी के संचालन में संपन्न मजलिस कार्यक्रम को खेताब करते हुए मौलाना हैदर अब्बास ने आगे कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम के घराने ने सत्य, न्याय, धैर्य, संयम, सहिष्णुता तथा मानव मूल्यों की जो पूंजी सौंपी है वह बेशकीमती है, उसकी कद्र और हिफाजत करना हम सब का परम कर्तव्य है। अंत में कहा औरतों पर हाथ उठाना सबसे घृणित कृत्य है। पैगंबर मोहम्मद साहब तथा मौलाना कायनात हजरत अली द्वारा न केवल नारी सम्मान बल्कि नारी सशक्तिकरण के लिए जो कदम उठाए वह मानवजाति के लिए मील का पत्थर है।
उससे पूर्व अधिवक्ता मोहम्मद मूनिस जाफरी ने पेशखानी करते हुए कहा मामता की जिंदगी है, इश्क की मंजिल है मां। डूब सकती है ये खुद ये सच है बेटे के लिए, वक्त के तूफान में हम सूरते साहिल है मां। मुबारक जलालपुरी ने कहा लाल प्यासा है मेरा लाल की सक्का मां थी। रमजान अली और मीर तालिब अब्बास ने हमनवा संग सोजखानी किया। उक्त अवसर पर पूर्व कांग्रेस में एमएलसी सैयद सिराज मेहदी, हसन अस्करी मजलिसी, साबिर अली एडवोकेट, गुलरेज जैदी, फरहान हैदर सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे।

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