उजागर हुआ मामला तो मीडिया बन गई दोषी

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अवधी खबर

अम्बेडकर नगर। विगत दिनों मीडिया द्वारा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में तैनात जिला समन्यवक संविदा कर्मी विपुल सिंह द्वारा मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से शिक्षकों के अवकाश स्वीकृत में की जा रही मनमानी एवं भ्रष्टाचार से संबंधित खबरों को लगातार प्रकाशित किया जा रहा था, संबंधित प्रकरण में बेसिक शिक्षा अधिकारी अम्बेडकरनगर ने उक्त जिला समन्यवक पर कार्यवाही करने के बजाय, बचाने के उद्देश्य से उच्चाधिकारियो को अवगत कराया कि खबर साक्ष्य रहित,झूठी और मनगढंत है।

जिससे यह प्रतीत होता है कि विपुल सिंह द्वारा की जा रही मनमानी में साहब ने मौन स्वीकृत दे रखी है। जबकि खबरों को कई साक्षो और पुष्टित सूचनाओं के आधार पर प्रकाशित किया जाता है। रही बात खबरों की तो मीडिया का काम है समाज व आस-पास की समस्याओं को शासन और प्रशासन के सामने लाना है

जिससे अधिकारियों का ध्यान उस प्रकरण की तरफ आकर्षित किया जा सके और व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जा सके। यदि सवाल उठा है तो उच्चाधिकारियों द्वारा इस प्रकरण की जांच की जानी चाहिए, स्वतः दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। अब सवाल उठता है कि मानव संपदा पोर्टल पर अवकाश हेतु आवेदन करने के कितने समय पश्चात अनिवार्य रूप से स्वीकृत या अस्वीकृत करने प्रावधान है।

क्या आवेदन को कई दिनों तक लंबित रखने का अधिकार संबंधित को है जो अक्सर देखने को मिलता है अब सोचने की बात यह है कि जब आवेदक शपथपत्र के साथ अपने चिकित्सकीय एवं अन्य पत्राजातों को पोर्टल पर प्रेषित करता है तो उसे संबंधित खण्ड शिक्षा अधिकारी द्वारा अग्रसारित किया जाता है तो फिर कैसे बीएसए कार्यालय द्वारा पत्राजातों की कमी का हवाला देते हुए एक ही आवेदन को कई-कई बार रद्द किया जाता है तो क्या यह मान लिया जाय कि जिले में खण्ड शिक्षा अधिकारियों को जानकारी का अभाव है

जो कि बिना जांचे, बिना देखे और अपूर्ण पत्राजातो को अग्रसारित कर देते हैं? इससे प्रतीत होता है कि नियमों और विभाग की सारी जानकारी बीएसए कार्यालय के उक्त बाबू के पास ही है। मनमानी का आलम यह है कि आवेदन को अस्वीकृत करने के बाद आख्या में यह भी स्पष्ट नही किया जाता है कि आखिर कमी किन पत्रजातों की है।

जब किसी शिक्षक व कर्मचारी का अवकाश अस्वीकृत किया जाता है तो संबंधित शिक्षक की अनुपस्थिति प्रदर्शित होने लगता है। बस यहीं से दबाव का काम शुरू होता है। फिर इसके बाद क्या होता है पूर्व की खबर में प्रकाशित किया जा चुका है उक्त खबर प्रकाशित होने पर ऐसा माना जा रहा है था कि बेसिक शिक्षा अधिकारी अथवा उच्चाधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए गहनता से जांच कराएंगे साथ ही कार्यवाही करेंगे।

लेकिन यहां तो बेसिक शिक्षा अधिकारी विपुल सिंह के बचाव में खड़े नजर आ रहे हैं। रही बात बेसिक शिक्षा अधिकारी की तो यह अपने जिम्मेदारियों से कैसे भाग सकते हैं,जब मानव संपदा पोर्टल के लॉगिन पैनल से सम्बंधित गोपनीय जानकारी जैसे लॉगिन आई डी एवं पासवर्ड उनके पास रहता है तो बिना उनकी जानकारी के इस तरह मानव संपदा पोर्टल का दुरुपयोग कैसे किया जा रहा है, यह कैसे संभव है या तो इन्होंने लॉगिन आई डी एवं पासवर्ड विपुल सिंह को दे दिया है

अथवा बिना अधिकारी की जानकारी के विपुल सिंह बाईपास करके अनुमादन का सारा बागडोर अपने हाथ में रखे हुए हैं। विगत छः माह के अवकाश से सम्बंधित गतिविधियों को देखा जाय तो ऐसे कई प्रकरण हैं जिनके जांच के उपरांत यह स्पष्ट हो जाएगा कि जानबूझकर एक ही आवेदन को कई बार अस्वीकार किया जाता है जिससे उक्त कर्मचारी का ऑनलाईन अनुपस्थिति प्रदर्शित होने लगे और वह दबाव में आ जाय, इसके अतिरिक्त पत्राजातों को अपूर्ण बताकर निरस्त कर देना,निजी लाभ होने पर उसी पत्राजातों पर अवकाश हेतु अनुमोदन देना,प्रसव उपरांत भी आवेदन निरस्त कर देना, कई -कई दिनों तक आवेदन लंबित रखकर निजी लाभ की आशा में शिक्षकों व कर्मचारियों पर दबाव बनाना कहीं न कहीं शोषण और भ्रष्टाचार की तरफ ही इशारा कर करते हैं।

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