ऐ अज़ादारो ग़मे शब्बीर को रूख़सत करो…

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ऐ अज़ादारो ग़मे शब्बीर को रूख़सत करो…

अंबेडकरनगर। अय्यामे अजा के दो माह और आठ दिनों तक चलने वाले मजलिसो मातम, जुलूसे अमारी के रूप में गम मनाने का सिलसिला बुधवार को जनपद के विभिन्न स्थानों पर मजलिसें और शिया बाहुल्य कस्बा जलालपुर में असीराने कर्बला की याद में जुलूसे अमारी के अंतिम कार्यक्रम के साथ गुरुवार से रंजोगम का दौर थम जाएगा।
कैद-ए-शाम से असीराने करबला के लुटे हुए काफिले की याद में माहे रबीउल अव्वल की एक से सातवीं रबीउल अव्वल तक लगातार मजलिसें शब्बेदारी व जुलूस-ए-अजा के आयोजन गांव गांव में संपन्न हुए। जाकिरीन ने शहादते इमाम हुसैन के बाद खानदाने रिसालत के असीरी की दास्तां बयां करते रहे तो मातमी अजुमनें असीराने कर्बला के साथ किस तरह बीबीयों, बीमारे नातवां इमाम हजरत जैनुल आबिदीन व जनाबे सकीना पर यजीदी सेना द्वारा ढ़ाए गए जुल्मों सितम की घटना को नौहों की शक्ल मे पढ़ कर लोगों को रोने पर मजबूर किया। नगर के मोहल्ला मीरानपुर, अब्दुल्लाहपुर, गदायां, सिंझौली, लोरपुर-पीरपुर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों वाजिदपुर, कटौना, दहियावर सहित दूरदराज के अरसावां, खासपुर, पकरी खास, नसीराबाद, बेला परसा, गौरा मोहम्मदपुर, भवरा, दाऊदपुर, कटघरकमाल, मछलीगांव, कटघरमूसा, हजपुरा, कजपुरा, रसूलपुर, रोशनगढ़ जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में भी कर्बला के बलिदानियों की याद में जुलूस-ए-अजा निकाला गया। उक्त कार्यक्रमों में नौहों के एक-एक बंद पे अजादार आ़खों मे अश्क भर कर गिरिया व बैन करते रहे जिससे मजलिसो मातम की सदाओं से माहौल शोकपूर्ण बना रहा। बुधवार को विभिन्न स्थानों पर मजलिसो मातम और जलालपुर में अमारी जुलूस का अंतिम दिन होगा और अगले साल तक अजाखाने वीरान हो जाएंगे।

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