हर तरफ़ है सदा या हुसैन अलविदा…

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हर तरफ़ है सदा या हुसैन अलविदा…

अंबेडकरनगर। जलालपुर तहसील क्षेत्र के हजपुरा में नकवी कमेटी की ओर से जुलूसे अमारी का वार्षिक कार्यक्रम शनिवार को सुबह पांच बजे शुरू हुआ जो दिन भर जारी रहा। नौहोमातम के शोर और उल्मा की दहाड़ से फिजा गूंजती रही। इस बीच श्रद्धालुओं ने तबर्रुकात के दर्शन किए।
मौलाना जीशान अली आजमी ने अलम मुबारक से लेकर ताबूत, गहवारए अली असगर, दुलदुल और ऊंटों पर सजी अमारियों का एक-एक कर परिचय कराया तो सोगवार अपनी आंखों में आंसू नहीं रोक सके। उन्होंने कहा अजादारी हमारी जान है और इसी के लिए हम पैदा किए गए हैं। आगे कहा गमे हुसैन बुलाएगा खुद ही लोगों को, हमारा काम है फर्शे अजा बिछा देना। मौलाना कैसर अब्बास आजमी ने कहा गलत फहमी का शिकार यजीद समझ रहा था कि हुसैन के सरो तन में जुदाई करने से शरीयत मिट जाएगी और इस्लाम खत्म हो जाएगा। जबकि जैदपुर बाराबंकी से आए मौलाना इब्ने अब्बास ने कहा आका हुसैन की शहादत ने मोमिनीन के दिलों में जो हरारत पैदा की है वह कभी खत्म होने वाली नहीं है। इसी क्रम में कटघरकमाल निवासी मौलाना बकीअ जाफरी ने मौला अब्बास का तजकिरा करते हुए कहा हजरत अब्बास अलमदार एक मुकम्मल किताब हैं। बादशाह यजीद ने इब्ने ज्याद से पूछा था कि लश्करे हुसैन में कितने लोग हैं। उसने जवाब दिया लश्कर तो सिर्फ 72 का है, लेकिन उसमें एक अब्बास भी हैं। यह थी मेरे गाजी अब्बास की हैबत। मौलाना नदीम रजा जैदी, मौलाना नूरूल हसन रिजवी और मौलाना सैयद परवेज कमाल ने भी संबोधित किया। संचालन अर्शी मौलाई ने किया। डा.आमिर अब्बास लकी, वसी, काजिम हुसैन लल्लू, सिब्ते हसन, मुन्ने आदि ने अतिथियों की आवभगत किया।
कार्यक्रम के द्वितीय चरण में स्थानीय अंजुमन असगरिया के लोगों ने नौहाखानी का आगाज करते हुए कहा कब्रे अब्बास पर आबिद ने कहा रो-रो कर, ऐ चचा मर गई जिंदा में सकीना घुटकर। तत्पश्चात सम्भल से आए मशहूर शायर मीर नजीर बाकरी ने भी नौहा पढ़ते हुए कहा दिन ढला तो रूराने को शाम आ गई, जुल्म जैनब पर ढाने को शाम आ गई। इसके बाद अंजुमन जीनते अजा बहिश्ती अलीगढ़-सुल्तानपुर ने पढ़ा लाल मेरे आजा, बानो का है ये नाला खाली है तेरा झूला। अंजुमन मोईनुल अजा दाऊदपुर के नौहाखान तकी अब्बास व शबीहुल अब्बास आदि ने पढ़ा हर तरफ है सदा, या हुसैन अलविदा। जबकि अंजुमन सज्जादिया नागपुर जलालपुर के डा. आफताब और अकील अब्बास आदि ने मीर नजीर बाकरी का कलाम जैनब ने कहा रोकर देखा जो बरादर को, पहचान न पाई मैं अब्बास तेरे सर को तथा जैनब की आ रही थी सदा कर्बला के बाद पेश किया। अंजुमन गुलशने अब्बास भादी-शाहगंज जौनपुर ने पढ़ा सोगरा है कहीं और सकीना है कहीं और।

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