देवघर (वैद्यनाथ धाम), झारखंड की यात्रा : एक संस्मरण

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खुल्लम खुल्ला ,,,,,,,,,,,,,हमें जमाने से क्या इस गीत के बोल दिनांक 6 सितम्बर, 2022 को हम लोगों ने झारखंड राज्य के दुमका जिले के वासुकीनाथ मंदिर के दर्शन के पूर्व बस स्टैंड पर देखा। हम लोगों की टीम अक्सर कहीं न कहीं पर्यटन स्थलों पर जाती रहती है। इसी क्रम में वाराणसी से 6 सितम्बर, 2022 की रात्रि में चलकर प्रात: 6:30 बजे जस्सीडीह रेलवे स्टेशन पर उतरकर गाड़ी से वैद्यनाथ धाम के पास होटल पहुंचकर स्नान आदि करने के बाद बाबा भोलेनाथ के दर्शन पूजन करने गए। वहाँ इस भादों महीने भी कांवरियों की भारी भीड़ थी। एक प्रकार से रेला कहा जाय तो ठीक, ऊपर से पण्डो की बादशाहत। वीआईपी टिकट लेकर सातों लोग अंदर हो गए। वहां कुछ दूर जाकर सभी को सामान्य पंक्ति में खड़ा कर दिया,सारा वीआईपी पन भूल गया। बाप रे पूरा गदर,आदमी से लड़ते भिड़ते लोग,दर्शन और मंत्र से ज्यादा गाली गलौज,लड़ाई झगड़ा, कहा सुनी,मानों पटीदारी निभाने आए हैं। लोगबाग बाबा भोलेनाथ के दर्शन पूजन के लिए एक दूसरे को धकियाकर आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे थे। खैर हम लोग भी किसी भी तरह बाबा का दर्शन पूजन करने में आखिरकार सफल ही हो गये। कुछ तो मेरे ऊपर ही जल का लोटा उलट दिए, पूरे कपड़े भीग गए। वहाँ से निकलकर यात्रा वासुकीनाथ जी के दर्शन के लिए आगे बढ़ी। अपनी गाड़ी जहां रुकी वहाँ का नजारा जो देखने को मिला वह गजब का ही था। पहले तो मैं कुछ समझ नहीं पाया। लोगों से पूछताछ किया तो पता चला की महुआ है। ऐसी खुलेआम बिक्री कभी देखी नहीं,तो उत्सुकतावश पूरी पड़ताल कर डा जगदीश सिंह दीक्षित सर से पूरा वाकया सुनाया उसे सुनकर वे तो चक्कर खा गये,फिर फोटो ली,भाई राघवेंद्र सिंह ने भी फोटो ली,बड़ी मुश्किल से कुछ बातें मैं उस आदिवासी महिला सुनिया से जान सका। जगदीश सर कहने लगे-रामा हो रामा–-और अपना माथा पीटने लगे।उनके साथ और जो लोग चल रहे थे वे लोग उनकी इस दशा को देखकर घबड़ा गए। मैंने उन लोगों को भी वह पूरा दृश्य दिखाया। मेरे एक साथी जो झारखंड राज्य के ही रहने वाले हैं,और भौतकविद हैं,जिनके साथ हम लोग गए थे,उन्होंने बताया कि यह तो इस राज्य के आदिवासी भाइयों एवं भगिनियों के लिये आम बात है। यहां बहुत गरीबी है। आदिवासी क्षेत्रों में महुआ बहुत होता है। उसकी कच्ची शराब लोग बनाते हैं।

उस शराब को पीते और बेचते हैं। इससे जो कुछ आमदनी हो जाती है उससे घर परिवार का तो खर्च चलाते ही हैं और अपने बच्चों की पढाई -लिखाई पर भी खर्च करते हैं। मुझे सुनिया जी ने साक्षात्कार के दौरान बताया कि महुआ की (शराब) बिक्री से ही पूरे परिवार का खर्च चलता है। मेरे यह पूछने पर की खुलेआम शराब बिक्री कर रही हैं पुलिस नही रोकती है,उन्होंने बहुत स्पष्ट कहा कि क्यों रोकेगी सूखा पड़ा है हम खायेंगे क्या? वहाँ अधिकांश महिलाएं ही इस कच्ची शराब को बेच रही थीं। वह भी खुल्लम-खुल्ला। इसके लिए किसी लाइसेंस की जरूरत नहीं है। बगल में मक्का का भुट्टा भुना जा रहा था। पीने वाले भुट्टा खाकर एक या दो छोटी गिलास उस कच्ची शराब को धड़ल्ले से गटक जा रहे थे। सुनिया जी से दाम पूछने पर बताया की एक गिलास का दाम 20 रूपये है,बातचीत चलती रही फिर उन्होंने कहा कि पीएंगे भी या खाली बतियायेगे ही। मैने जब कहा कि पीयूंगा तो नहीं लेकिन आपने अपना वक्त दिया है बीस रुपए रख लीजिए,लेकिन बड़े ही स्वाभिमान के साथ कहा नहीं मुफ्त का पैसा नहीं लेंगे। खैर छोडिए–। आगे जाकर वासुकीनाथ जी का दर्शन पूजन करने के बाद यात्रा देवघर के लिये बढ़ी। बीच में एक जगह थी ” पेड़ा नगरी, घोरमारा,देवघर”। इस बाजार में केवल और केवल पेड़े की ही दुकानें थी, जिनकी संख्या सौ से भी अधिक थी। इतनी बड़ी मंडी कभी नहीं देखी थी। आगे दुर्गा रेस्तरां में भोजन करने के बाद “नवलखा” मंदिर को देखकर हमलोग देवघर आकर रात्रि में रेलगाड़ी में बैठकर 7 सितम्बर,2022 को वाराणसी वापस आ गये।

उस खुल्लम-खुल्ला दृश्य की एक झलक
डा ओम प्रकाश चौधरी
अध्यक्ष,मनोविज्ञान विभाग
श्री अग्रसेन कन्या पी जी कॉलेज वाराणसी।

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