राष्ट्र के विकास में विश्वकर्मा समाज का योगदान महत्वपूर्ण : राममूर्ति वर्मा

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राष्ट्र के विकास में विश्वकर्मा समाज का योगदान महत्वपूर्ण : राममूर्ति वर्मा

अंबेडकरनगर। भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का सबसे पहला इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है। वह पौराणिक काल के सबसे बड़े सिविल इंजीनियर समझे जाते हैं। उनका उल्लेख 12 आदित्यों और लोकपालों के साथ ऋग्वेद में भी है।
उक्त विचार विधायक टांडा व पूर्व मंत्री राममूर्ति वर्मा ने नगर के बसखारी मार्ग पर अखिल भारतीय विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के तत्वावधान में आयोजित भगवान विश्वकर्मा पूजा समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की उन्नति में विश्वकर्मा समाज का महत्वपूर्ण योगदान है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता है। विशिष्ट अतिथि विधान परिषद सदस्य रहे हीरालाल यादव ने कहा कि प्राचीन काल में जितनी राजधानियां थी, उनका निर्माण भगवान विश्वकर्मा के द्वारा ही किया गया था। पिता की भांति विश्वकर्मा जी भी वास्तुकला के अद्वितीय आचार्य बने। कार्यक्रम के संयोजक एवं अखिल भारतीय विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के प्रदेश सचिव प्रभंजन विश्वकर्मा ने कहा सतयुग का स्वर्ग लोक, त्रेता युग की लंका, द्वापर की द्वारिका या फिर कलयुग के हस्तिनापुर के निर्माता भगवान विश्वकर्मा ही थे। भगवान दास विश्वकर्मा की अध्यक्षता में आयोजित उक्त कार्यक्रम में शिरकत करते हुए विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय संयोजक रामआसरे विश्वकर्मा ने कहा भगवान विश्वकर्मा के अनेक रूप हैं। जिसमें दो, चार एवं दस बाहु वाले तथा एक मुख, चार मुख तथा पंचमुख वाले। उनके मनु, मय, त्वष्टा, शिल्पी एवं दैवज्ञ नामक पांच पुत्र हैं। कहा जाता है कि ये पांचों वास्तु शिल्प की अलग-अलग विधाओं में पारंगत थे और उन्होंने कई वस्तुओं का आविष्कार किया इस प्रसंग में मनु को लोहे से, मय को लकड़ी, त्वष्टा को कांसे एवं तांबे, शिल्पी ईंट और दैवज्ञ को सोने-चांदी से जोड़ा जाता है। कार्यक्रम में किसान विकास उद्योग सद्दरपुर-टांडा के ओमकार विश्वकर्मा, बरही ऐदिलपुर ग्राम पंचायत के प्रधान प्रतिनिधि विजय वर्मा और सुरेश कुमार ने भी संबोधित किया।

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