इस्लाम का गुलशन कभी आबाद न होता…

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इस्लाम का गुलशन कभी आबाद न होता…

अंबेडकरनगर। शम्मे इमामत की चौथी कड़ी इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम के बलिदान दिवस 25 मोहर्रम बुधवार को जनपद के अनेक स्थानों पर मजलिसो मातम के साथ मातमी जुलूस निकाल कर इमाम के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
इसी क्रम में यौमे शहादत की पूर्व संध्या पर इमामबाड़ा मीरानपुर में डा. कासिम हुसैन कासिद अकबरपुरी की ओर से आबिदे बीमार का मातम शीर्षक से वार्षिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मौलाना मोहम्मद अब्बास रिजवी ने बतौर मुख्य वक्ता शायर जवाद जाफरी के इस शेर से शुरूआत करते हुए कहा पाबंद सलासिल में जो सज्जाद न होता, ये दीन कभी कैद से आजाद न होता, गर खून से आबिद उसे सैराब न करता, इस्लाम का गुलशन कभी आबाद न होता। संबोधित करते हुए मौलाना ने आगे कहा इमाम हुसैन की शहादत के बाद इमाम हुसैन के पुत्र इमाम सैय्यदे सज्जाद और बहन जनाबे जैनब समेत उनके परिवारीजनों को उमवी शासन द्वारा गिरफ्तार कर कूफा लाया गया जहां इमाम सज्जाद ने लोगों के बीच इस प्रकार भाषण दिया कि लोग द्रवित हो गए और पश्चाताप करते हुए इमाम जैनुल आबिदीन से छमा याचना किया। हसन अब्बास सोनू ने कासिद अकबरपुरी का नौहा आबिद पुकारे रोकर अम्मू मदद को आओ प्रस्तुत किया तो अजादार रो पड़े। अंजुमन अकबरिया के मिर्जा वसी हसन, रजा अनवर, सादिक हुसैन, असरार हुसैन, काजिम हुसैन, ताजीम अली, दानिश आदि ने शायर आकिल फैजाबादी, मद्दाह फैजाबादी, शम्स अकबरपुरी, कमर अकबरपुरी, असर अकबरपुरी का कलाम पेश किया।

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