क़यामत तक जारी रहेगा ज़िक्रे हुसैन : मोहम्मद अब्बास रिज़वी

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क़यामत तक जारी रहेगा ज़िक्रे हुसैन : मोहम्मद अब्बास रिज़वी

अंबेडकरनगर। झूठ बोलना एक बड़ा गुनाह ही नहीं लानत का हार भी है लिहाजा इससे बचें। झूठ और गुनाह की अनेक किस्में हैं। उदाहरण स्वरूप किसी साधारण व्यक्ति एवं धर्मगुरु के झूठ बोलने में असाधारण अंतर है तथा उसी अनुपात में पाप का निर्धारण किया गया है। यह तथ्य जनपद के वरिष्ठ आलिमेदीन, प्रखर वक्ता, विद्वान मौलाना मोहम्मद अब्बास रिजवी ने प्रस्तुत किया।
वह बड़ा इमामबाड़ा मीरानपुर में सोमवार की रात अख्तर हुसैन की ओर से मरहूम मोहम्मद हुसैन बब्बू व शमसी हुसैन के पुण्य हेतु आयोजित मजलिस को संबोधित कर रहे थे। धाराप्रवाह बोलते हुए मौलाना अब्बास ने आगे कहा कि यदि मौला अली अपने दौरे खिलाफत में बाग-ए-फिदक वापस ले लेते तो शक्ति के दुरुपयोग का लांछन लगता जो मौलाये कायनात को किसी दशा में स्वीकार नहीं था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा सृष्टि की रचना के पहले दिन से आज तक और अब से लेकर संसार के अस्तित्व में रहने तक यदि किसी ने रत्ती बराबर भी किसी का हक मारा या हड़प करेगा तो बारगाहे इलाही में निश्चय ही उसकी जवाबदेही होगी। छल-कपट से हासिल किया गया पद या मंसब किसी काम का नहीं, क्योंकि उससे अनैतिकता की सड़ांध आती रहेगी। अंत में नवासए रसूल हजरत इमाम हुसैन के बलिदान को याद करते हुए मौलाना अब्बास ने कहा कि इस कुर्बानी-ए-अजीम का उल्लेख महाप्रलय तक जारी रहेगा। क्योंकि यजीद बिन मुआविया जैसे अधर्मी की लाखों की फौज के सामने धर्म व मानवता की रक्षार्थ मात्र 72 लोग अंजाम की परवाह किए बगैर चट्टान बन कर खड़े हो गए थे। जिनका नाम इस्लामी इतिहास में अमर व अजर हो गया।

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