दीने इस्लाम की हिफ़ाज़त कर हुसैन ने निभाया वादा : मुशीर अब्बास

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दीने इस्लाम की हिफ़ाज़त कर हुसैन ने निभाया वादा : मुशीर अब्बास

अंबेडकरनगर। 28 रजब सन् 60 हिजरी को जब इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का काफिला मदीने से करबला के लिए कूच किया था तो उन्होंने स्पष्ट तौर पर उद्देश्य प्रकट करते हुए कहा था मेरा सफर लड़ाई झगडे़ अथवा किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न करने के लिए नहीं, बल्कि यह शुद्ध रूप से नाना रसूले खुदा की उम्मत की इस्लाम और भलाई के लिए है।
उक्त बातें इमामबाड़ा मीरानपुर में डा.आमिर अब्बास लकी की ओर से अपने वालिद डा. मोहम्मद हसन के इसाले सवाब के लिए आयोजित वार्षिक मजलिस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मौलाना मुशीर अब्बास ने व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बचपन में हुसैन ने नाना रसूल से धर्म रक्षा का जो वचन दिया था उसी का मान रखने के लिए दूसरी मोहर्रम सन् 61 हिजरी को करबला पहुंचे थे। मौलाना ने आगे कहा कि जिस दीने हक को फैलाने में अल्लाह द्वारा भेजे गए एक लाख 24 हजार नबियों ने जिंदगियां कुर्बान कर दीं संकट पड़ने पर इमाम आली मकाम ने स्वजनों सहित प्राणों की आहुति देकर उसी दीने इलाही को कयामत तक के लिए सुरक्षित कर दिया। मस्जिदों से उठने वाली अजानें, नमाज और तिलावते कुरान इमाम हुसैन की जय और विजय का प्रत्यक्ष प्रमाण है। लिहाजा हुसैन का वास्तविक अनुयायी नमाज और कुरान के प्रति लापरवाही नहीं कर सकता है। दूसरी तरफ परवर दिगार की ओर से यह भी हिदायत है कि खबरदार नशे की हालत में मस्जिदों में दाखिल न होना। अंत में अंजुमन मोईनुल अजा दाऊदपुर-जलालपुर ने नौहोमातम किया।

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