परवर दिगार की मर्जी से ही बोलते थे रसूले अकरम : मौलाना जुहैर

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परवर दिगार की मर्जी से ही बोलते थे रसूले अकरम : मौलाना जुहैर

अंबेडकरनगर। शहीदान-ए-करबला की याद में जनपद भर में दिन भर मजलिसो मातम के साथ मातमी जुलूसों का सिलसिला जारी है। बृहस्पतिवार को आधा मोहर्रम बीत चुका है। अब मात्र पांच दिन ही अशरए मोहर्रम के शेष रह गए हैं। समय व्यतीत होने के साथ ही अजादारों में अजा की शिद्दत बढ़ती जा रही है। बृहस्पतिवार को मोहल्ला मीरानपुर स्थित मरहूम मास्टर सैय्यद इब्ने हसन तकवी के अजाखाने में अली कौसर तकवी एवं अली रहबर तकवी की ओर से नियमित मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना सैय्यद मोहम्मद जुहैर ने कहा कि रसूले अकरम परवर दिगार की मर्जी के बिना एक शब्द भी नहीं बोलते थे। उनका प्रत्येक अमल मर्जिए माबूद के मुताबिक ही होता था। मौलाना जुहैर ने अलमदार हुसैन और सरवर हुसैन के अजाखाने में भी मजलिस को खेताब किया। जबकि जामा मस्जिद मीरानपुर के पेश इमाम मौलाना अकबर अली वाएज जलालपुरी ने बड़ा इमामबाड़ा राजा साहब, मरहूम सिब्ते मोहम्मद नकवी और मरहूम जौव्वाद हुसैन खान के अजाखाने में संबोधित करते हुए कहा कि संसार में आते-जाते रहेंगे मगर अजादारी का सिलसिला कयामत तक रवां-दवां रहेगा। क्योंकि यह अजादारी व अजादार हैदर की तमन्ना और बीबी फातिमा जहरा की दुआ हैं। टांडा तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मदारपुर स्थित अजाखाना बीबी सैय्यदा में डाक्टर मजीद हसन आदि की ओर से आयोजित अशरए मोहर्रम की मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना अरशी मौलाई ने बृहस्पतिवार को कहा आली मकाम हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम हम सब के लिए चिराग-ए-हिदायत और कश्ती-ए-निजात हैं। उन्होंने इमाम हुसैन की अजीम कुर्बानी का जिक्र करते हुए कहा यह ऐसा गम है जिसका इंतेजार अजादारों को साल भर रहता है और इस गम के आगे हम लोग अपना बड़ा से बड़ा गम भूल जाते हैं। सैय्यद शादाब हसन, सैय्यद नायाब हसन आदि उपस्थित थे।

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