बिछता है तेरे दम से ये फ़र्शे अजा़ जै़नब….

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अंबेडकरनगर (अवधी खबर)। खालिक-ए-कायनात अल्लाह रब्बुल इज्जत हमेशा से हैं और हमेशा रहेंगे। रब ने मनुष्यों को जीवों में सर्वश्रेष्ठ रखा। यहां तक कि फरिश्तों से भी कद ऊंचा किया। यह तथ्य मौलाना मोहम्मद अब्बास रिजवी ने प्रस्तुत किया। वह मीरानपुर स्थित इमामबाड़ा बैतुल अजा में डा. कासिम हुसैन ‘क़ासिद अकबरपुरी’ द्वारा आयोजित मरहूम सादिक हुसैन वल्द इब्ने हसन के इसाले सवाब की मजलिस को संबोधित कर रहे थे।
मौलाना मोहम्मद अब्बास ने अजादारों विशेष रूप से युवाओं को इंगित करते हुए कहा फर्शे मजलिस की अजमत को समझना होगा। जहां ये फर्शे मजलिस जनाबे जैनब बिन्ते अली का अता किया हुआ है, वहीं अजादार दुआ-ए-जहरा हैं। उन्होंने बल देकर कहा कि जहां कहीं भी मजलिस में जाएं तो इधर उधर बैठने के बजाए हमेशा फर्श पर बाअदब बैठें और गंभीरता से बयान सुनकर उसे आत्मसात करें, अन्यथा की स्थिति में पुण्य के स्थान पर पाप के भागीदार बन सकते हैं। मौलाना अब्बास ने कहा परवर दिगार के बेपनाह लुत्फो करम के बावजूद यदि कोई उम्मती नर्क का भागीदार बनता है तो यह उसका दुर्भाग्य ही होगा। अंत में कहा- बिछता है तेरे दम से ये फर्शे अजा जैनब, ये मजलिसो मातम है सब तेरी अता जैनब। जौन, रजी, अदनान आदि ने पेशखानी और और असरार अब्बास ने नौहाखानी किया। संचालन का उत्तरदायित्व सज्जाद अस्करी ‘जमन’ ने निभाया। मेहदी रजा ‘आफताब’, मिर्जा परवेज मेहदी, अनवर हुसैन, इम्तियाज हुसैन, मेहदी हसन, कमर अब्बास, ऐजाज हुसैन, असर अकबरपुरी, गालिब अब्बास, ताजीम अली, जहबी, जामिन, अमलदार, सादिक हुसैन, शफीक हुसैन, रियाज हुसैन सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

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