स्वरोजगार योजना पर भारी पड़ रही बैंकों की मनमानी

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अम्बेडकरनगर। उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की तरफ से प्रधानमंत्री सूक्ष्म उन्नयन योजना का संचालन किया जा रहा है। इस योजना में बेरोजगार उद्योग लगाकर स्वावलंबी बन सकते हैं लेकिन बैंकों की मनमानी योजना पर भारी पड़ रही है।
योजना में राईस मिल, फ्लोर मिल, आयल मिल, बेकरी आदि इकाईयों की स्थापना के लिए 35 प्रतिशत या अधिकतम दस लाख रुपए तक अनुदान प्राप्त कर बेराजगार लाभ उठा सकते हैं। ईकाई लागत का दस प्रतिशत अंशदान उद्यमी को स्वयं वहन करना पड़ेगा। योजना के तहत चालू वित्तीय वर्ष में दर्जन भर ऋण पत्रावलियों को विभिन्न बैंकों में आनलाइन भेजा गया है लेकिन ये पत्रावलियां बैंक शाखाओं चार माह से धूल फांक रही है। उद्यमी राम अजोर ने राइस मिल, प्रेम सागर गुप्ता मसाला उद्योग, मंशाराम यादव नमकीन, प्रिया मिश्रा डेयरी प्रोडक्ट्स, अमित उपाध्याय मसाला उद्योग, कुंवर नवीन सिंह गुड़ एवं भेली उद्योग, किरन सिंह राइस मिल व अरविन्द कुमार मसाला उद्योग लगाने के लिए योजना के तहत बैंक शाखाओं में आवेदन किया है। ऋण पत्रावली स्वीकृत कराने के लिए उद्यमी बैंक शाखओं की परिक्रमा कर रहे हैं। कुछ आवेदकों ने बताया कि बैंक शाखाओं की तरफ से ऋण स्वीकृत करने में टालमटोल किया जा रहा है तथा अकारण पत्रावलियों को निरस्त कर दिया जा रहा है। डिस्ट्रिक्ट रिसोर्स पर्सन मोहित कुमार मौर्यने बताया कि पत्रावलियों की स्वीकृति में हो रहे विलम्ब के संबंध में एलडीएम से वार्ता की गई है। उन्होंने ऋण पत्रावलियों को स्वीकृत कराने का आश्वासन दिया है।

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