अहिंसा के पक्षधर थे हजरत अली : मौलाना कुमैल अब्बास

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अंबेडकरनगर (अवधी खबर)। टांडा स्थित मोहल्ला मीरानपुर में अधिवक्ता सैयद वजीहुल हसन व ताजियादार समिति के सचिव सैयद रईसुल हसन गुड्डू के आवास से हजरत अली की याद में वार्षिक मातमी जुलूस संपन्न हुआ।
मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना कुमैल अब्बास जलालपुरी ने कहा हजरत अली का जन्म मक्का शहर में हुआ था। हजरत अली हमेशा कठिन समय में इस्लाम धर्म के काम आए। पैगंबर मोहम्मद साहब के प्रिय दीन को आम लोगों तक पहुंचाया। उन्होंने आजीवन शांति और अमन का पैगाम दिया। उनका मत था कि इस्लाम इंसानियत का धर्म है और वह अहिंसा के पक्ष में हैं। हजरत अली ने समाज से भेदभाव मिटानेने की कोशिश करते रहे। वे कहते थे अपने शत्रु से भी प्रेम करो तो वह एक दिन तुम्हारा दोस्त बन जाएगा। 27 जनवरी 661 ईस्वी तदानुसार 19वीं रमजान को कूफा की एक मस्जिद में सुबह के समय नमाज पढ़ते हुए अब्दुर्रहमान इब्ने मुल्जिम नामक जालिम ने ठीक सजदे की हालत में मौला अली पर जहर भरी तलवार से वार कर दिया। दो दिन बाद 21 वीं रमजान को उनकी शहादत हो गई। यह बयान सुनते ही मजलिस में मौजूद अजादार रो पड़े। अंजुमन शमशीरे हैदरी पकड़ी भोजपुर, अंजुमन सिपाहे हुसैनी हयातगंज व अंजुमन अजादारे हुसैनी मीरानपुरा ने नौहोमातम किया। निर्धारित मार्ग से गुजर कर जुलूस शाम को राजा का मैदान मीरानपुरा स्थित रजा मस्जिद में समाप्त हुआ। राजा सैयद जाफर रजा परवेज, राजा सैयद कायम रजा नजमी, आलीशान, रेहान, समर, सईद हसन आदि मौजूद थे। आयोजक वजीहुल हसन एवं रईसुल हसन ने शुक्रिया अदा किया।

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