राम अचल राजभर का गढ़ है ये सीट, लगा पाएंगे जीत का ‘छक्का’? आसान नहीं है विधानसभा में पहुंचने की राह

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अम्बेडकरनगर। उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले की अकबरपुर विधानसभा सीट बसपा का गढ़ मानी जाती रही है। यह सीट एक दलित बाहुल्य सीट है। इस सीट पर दलित मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा है, इस सीट से बसपा के रामअचल राजभर 2017 के विधानसभा चुनाव में पांचवी बार विधाययक चुने गए थे।अबंडेकर नगर में बसपा का खासा प्रभाव है। इस वजह से बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती 1998, 99, 2004 में अंबेडकरनगर से सांसद चुनी गईं। अकबरपुर सीट से बीएसपी प्रत्याशी चन्द्र प्रकाश वर्मा की विधानसभा में पहुंचने की राह आसान नहीं दिख रही है। विस चुनाव में दो पूर्व मंत्रियों से उनका सामना होगा। चन्द्र प्रकाश वर्मा 2017 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। पूरे प्रदेश में जब भाजपा की लहर थी, उस समय भी चंद्र प्रकाश वर्मा न केवल चुनाव हारे, बल्कि दूसरे स्थान पर भी नहीं पहुंच पाए और पूर्व मंत्री राममूर्ति के बाद तीसरे स्थान पर रहे।

इस बार अकबरपुर से 2 पूर्व मंत्री रामअचल और धर्मराज निषाद से चन्द्र प्रकाश वर्मा की टक्कर है। ऐसे में बीएसपी की राह मुश्किल में दिख रही है। बताते हैं कि चन्द्र प्रकाश जिस पार्टी में हैं, उसकी न तो लहर चल रही है और न ही बीएसपी के परंपरागत वोट व सजातीय वोट से उनकी नैया पार होती दिख रही है। ऐसे में अब देखना होगा कि चंद्र प्रकाश वर्मा उस वोट को किस तरह से अपने पाले में लाकर 2 पूर्व मंत्रियों बीजेपी के धर्मराज निषाद और सपा के रामअचल को चुनौती देते हैं। जानकारों का कहना है कि 2 पूर्व मंत्रियों का सामना करना चंद्र प्रकाश को शूट नहीं करता है। 2017 में भी 2 पूर्व मंत्रियों बसपा से रामअचल राजभर और सपा के राममूर्ति के चुनाव लड़ने से चंद्र प्रकाश तीसरे नंबर पर चले गए थे।

वहीं अबकी बार बीजेपी से पूर्व मंत्री धर्मराज निषाद के मैदान में आने से चंद्र प्रकाश लड़ाई से बाहर होते दिख रहे हैं। चन्द्र प्रकाश वर्मा 2 बार अकबरपुर नगर पालिका के अध्यक्ष रहे हैं। वह 2017 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन जब पूरे प्रदेश में मोदी की लहर चल रही थी और भाजपा गठबंधन 325 सीटें जीती थी, उस समय चन्द्र प्रकाश वर्मा न केवल चुनाव हार गए, बल्कि तीसरे स्थान पर रहे। उस चुनाव में चंद्र प्रकाश वर्मा को 57,881 वोट मिले थे। चन्द्र प्रकाश वर्मा चुनाव हारने के बाद बीजेपी में बने रहे और सत्ता का मजा लूटते रहे, लेकिन चुनाव से करीब 2 महीने पहले पाला बदल कर बसपा में शामिल हो गए और बसपा ने उन्हें अकबरपुर से मैदान में उतार दिया है। चन्द्र प्रकाश वर्मा 2017 में जब पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़े तो, उस समय भी उनके सामने दो पूर्व मंत्री थे, जिसमें से एक पूर्व मंत्री रामअचल राजभर थे तो दूसरे तत्कलीन मंत्री राममूर्ति वर्मा थे। उस समय 2 मंत्रियों के मकड़जाल में फंस कर चन्द्र प्रकाश वर्मा तीसरे नंबर पर चले गये थे।

वहीं इस बार भी इनके सामने 2 दिग्गज पूर्व मंत्री रामअचल राजभर और धर्मराज निषाद हैं। इसमें से रामअचल राजभर अकबरपुर से 5 बार विधायक रहे हैं तो दूसरे पूर्व मंत्री धर्मराज निषाद 3 बार कटेहरी से विधायक रहे। बताया जा रहा है कि ऐसे में दोनों पूर्व मंत्रियों से पार पाना चन्द्र प्रकाश वर्मा के लिए आसान नहीं होगा।हालांक‍ि 2022 में इस सीट पर जातिगत वोटों में सेंधमारी के जरिए भाजपा समेत दूसरे दल जीत के लिए प्रयासरत द‍िखाई दे रहे हैं।

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